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Saturday, June 29, 2024

Exclusive: NASA दो भारतीयों को देगा ट्रेनिंग, उनमें से एक को भेजेगा अंतरिक्ष में - ISRO चीफ ने NDTV से कहा

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) के साथ संयुक्त परियोजना के तहत अंतरिक्ष यात्री को अंतरिक्ष में भेजने का काम तय कार्यक्रम के अनुसार चल रहा है. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के प्रमुख डॉ एस सोमनाथ (Dr S Somanath) ने NDTV को दिए गए एक विशेष इंटरव्यू में यह जानकारी दी. डॉ सोमनाथ ने बताया कि भारत ने जिन चार अंतरिक्ष यात्रियों को चुना है, उनमें से दो को ट्रेनिंग के लिए नेशनल एरोनाटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (NASA) भेजा जाएगा और उनमें से एक को स्पेस मिशन के लिए चुना जाएगा.

डॉ सोमनाथ ने कहा, "इसी तरह अन्य दो को भी अलग तरह की ट्रेनिंग मिलेगी... इस प्रकार वे चारों इस कार्यक्रम के जरिए प्रशिक्षण के कुछ स्तरों से गुजरेंगे. अंतरिक्ष उड़ान के अन्य पहलुओं को लेकर कई इंजीनियरों को भी नासा द्वारा प्रशिक्षित किया जाएगा."

उन्होंने कहा कि इसरो का अंतिम लक्ष्य मानव को अंतरिक्ष में भेजना है और नासा के साथ पूरे कार्यक्रम से हासिल अनुभव भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी के लिए अंततः मानव को अंतरिक्ष में भेजने के अनुभव में सहायक होंगे.

क्या प्रमुख नेता भविष्य में अंतरिक्ष में जाने के लिए पात्र होंगे? इसरो प्रमुख ने एनडीटीवी के इस सवाल पर कहा, "जब हमें क्षमतावान हो जाएंगे, उदाहरण के लिए यदि कोई राष्ट्र प्रमुख अंतरिक्ष में जाना चाहता है तो उसे हमारे व्हीकल से, हमारी जमीन से जाना होगा. मैं हमारे गगनयान के तैयार होने, उसके सफल होने और ऐसा करने के योग्य होने का इंतजार करूंगा."

भारतीय अंतरिक्ष यात्री को अंतरिक्ष में भेजने के लिए इसरो का विकल्प केवल फाल्कन 9 और क्रू ड्रैगन कार्यक्रमों तक ही सीमित है. ऐसा क्यों है? इस बारे में डॉ सोमनाथ ने कहा कि पूरा कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) की तरह मिलकर काम करने के विचार पर आधारित है.

डॉ सोमनाथ ने कहा, "नासा ने अपने उपलब्ध अवसरों में से हमें एक सीट देने की पेशकश की है. नासा के लिए अनुबंध के अनुसार उपलब्ध व्हीकल के जरिए आगे बढ़ना जरूरी है. इसलिए उनके लिए हमें प्रस्ताव देना स्वाभाविक है. लेकिन एक कामर्शियल कॉन्ट्रेक्ट होने के कारण हमें अन्य भागीदारों के साथ एग्रीमेंट करना होगा. हम इसके लिए सहमत हैं. हमारे पास बहुत अधिक विकल्प नहीं हैं. हमें जो विकल्प मिला है, वह अमेरिका और नासा की ओर से दिया गया विकल्प है."

डॉ सोमनाथ ने कहा कि लॉन्चिंग के लिए कोई तय समय-सीमा नहीं है क्योंकि नासा अपनी राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं के लिए उपलब्ध व्हीकल का उपयोग कर सकता है. जिस लॉन्च में भारतीय अंतरिक्ष यात्री उड़ान भरेंगे वह इस वर्ष के अंत में तय किया गया था, लेकिन इसे आगे बढ़ाया जाएगा क्योंकि कई चीजें हो रही हैं. एनडीटीवी को बताया, उन्होंने कहा कि जब भी यह होगा, मिशन को "एक्सिओम 4" (Axiom 4) कहा जाएगा.

भारत और अमेरिका ने अंतरिक्ष में अंतर-संचालन गहरा करने के लिए मानव अंतरिक्ष उड़ान सहयोग के लिए रणनीतिक रूपरेखा पर 17 जून को हस्ताक्षर किए थे.

अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) जेक सुलिवन और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के बीच आईसीईटी बातचीत के बाद अमेरिका और भारत की ओर से जारी एक फैक्ट शीट में कहा गया था कि दोनों पक्ष लूनर गेटवे कार्यक्रम में भाग लेने के अवसर भी तलाश रहे हैं.

लूनर गेटवे कार्यक्रम का उद्देश्य अमेरिका के नेतृत्व में सहयोगात्मक आर्टेमिस कार्यक्रम के हिस्से के रूप में चांद के चारों ओर एक अंतरिक्ष स्टेशन का निर्माण करना है.

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