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Thursday, April 20, 2023

असम-अरुणाचल के बीच सीमा विवाद खत्म, गृहमंत्री अमित शाह ने करवाया समझौता; जानें क्या है पूरा मामला

साल 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले केंद्र की बीजेपी सरकार को उत्तर पूर्व के सभी राज्यों में शांति बहाली को लेकर एक बड़ी सफलता मिली है. असम और अरुणाचल के बीच 50 साल से चले आ रहे सीमा विवाद का अंत हो गया है.असम और अरुणाचल प्रदेश की सरकारों ने दोनों राज्यों के बीच पांच दशक से भी पुराने सीमा विवाद को खत्म करने के लिए गुरुवार को केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह के समक्ष एक समझौते पर हस्ताक्षर किया. इसके साथ ही दोनों पूर्वोत्तर राज्यों की सीमा पर स्थित 123 गांवों की समस्या का भी समाधान हो गया. असम और अरुणाचल प्रदेश 804.1 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करते हैं और अरुणाचल प्रदेश को 1972 में केंद्र शासित प्रदेश घोषित किए जाने के बाद से ही दोनों राज्यों के बीच यह सीमा विवाद चल रहा था.

किन शर्तों पर हुए हैं समझौते, क्या था पूरा मामला?

2 पूर्वोत्तर राज्य असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच पिछले 50 साल से बॉर्डर पर स्थित कुछ गांवों को लेकर विवाद था. दोनों ही राज्य 804.1 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करते हैं. साल 1972 में जब अरुणाचल प्रदेश को केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया उसी समय से दोनों ही पक्ष इन 123 गांवों पर अपना-अपना दावा करते रहे थे. कई बार प्रयासों के बाद भी दोनों पक्षों में सहमति नहीं बनी थी. गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हाल के दिनों में हुए कई दौर की वार्ता के बाद दोनों ही पक्षों के बीच सहमति बन गई.

अरुणाचल प्रदेश द्वारा स्थानीय आयोग के समक्ष 2007 में जिन 123 गांवों पर दावा किया था, उनमें से 71 पर सौहार्दपूर्ण समाधान निकल आया है. इनमें सरमा और खांडू के बीच 15 जुलाई, 2022 को ‘नामसाई घोषणापत्र' पर हस्ताक्षर के दौरान निकले 27 गांवों के समाधान, और आज के समझौते के तहत निकले 34 गांवों के समाधान शामिल हैं. इन 71 गांवों में से अरुणाचल प्रदेश में से एक गांव को असम में शामिल किया जाएगा, 10 गांव असम में ही बने रहेंगे और 60 गांवों को असम से लेकर अरुणाचल प्रदेश में शामिल किया जाएगा. बाकि बचे 52 गांवों में से 49 गांवों की सीमाएं अगले छह महीनों में क्षेत्रीय समितियों द्वारा तय की जाएंगी, वहीं भारतीय वायुसेना के बमबारी क्षेत्र में आने वाले तीन गांवों का पुनर्वास किया जाना आवश्यक है. इस समझौते के तहत दोनों राज्यों की सरकारें सहमत हुई हैं कि 123 गांवों पर यह अंतिम फैसला होगा और यह विवाद समाप्त हुआ.

"यह विवाद आजादी के बाद ही खत्म होना चाहिए था"

केन्द्रीय मंत्री शाह ने कहा कि ये विवाद आज़ादी के बाद ख़त्म होना चाहिए था लेकिन नहीं हुआ मुझे ख़ुशी है की ये मेरे कार्यकाल के दौरान हुआ. उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जबकि देश स्वतंत्रता का 75वां साल मना रहा है, दोनों राज्यों की अंतरराज्यीय सीमा पर स्थित 123 गांवों का विवाद अब हमेशा के लिए समाप्त हो गया है. शाह ने असम और अरुणाचल प्रदेश द्वारा पुराने लंबित सीमा विवाद को ‘सौहार्दपूर्ण' तरीके से सुलझाया जाना दोनों राज्यों के लिए ‘ऐतिहासिक' घटना है. शाह ने आशा जतायी कि 1972 से जारी इस पुराने सीमा विवाद की समाप्ति पूर्वोत्तर राज्यों में सर्वांगिण विकास और शांति लेकर आएगी.

गृहमंत्री ने कहा कि मोदी सरकार ने पूर्वोत्तर के कई स्थानों से आफस्पा को हटा लिया है. उन्होंने बताया, असम में 70 प्रतिशत, मणिपुर के छह ज़िलों के 15 पुलिस थानों, अरुणाचल में तीन ज़िले छोड़कर सभी ज़िलों, नगालैंड के सात जिलों और त्रिपुरा व मेघालय से पूर्णतया आफस्पा को हटा लिया गया है. असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने समझौते पर हस्ताक्षर को ऐतिहासिक बताया और कहा कि यह शांति और समृद्धि लाने वाला बनेगा.

यह ऐतिहासिक समझौता: पेमा खांडू

अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने सीमा विवाद की समाप्ति को ‘‘अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक'' बताया और भरोसा जताया कि इससे दोनों राज्यों में शांति और विकास में बड़ा बदलाव आएगा. उन्होंने कहा कि यह समझौता प्रधानमंत्री और गृहमंत्री की प्रेरणा और राजनीतिक इच्छाशक्ति तथा शर्मा नीत असम सरकार के सक्रिय सहयोग से संभव हो सका है.

संघीय ढांचा मजबूत होगा : हिमंत बिस्वा सरमा

असम के सीएम ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश के साथ आज का समझौता पिछले दो वर्षों में मेघालय के साथ किए गए प्रयासों के अनुरुप ही है. इससे पूर्वोत्तर में भाईचारे की भावना बढेगी और हमारा संघीय ढांचा मजबूत होगा क्योंकि यह राज्यों के बीच विवादों को सुलझाने का नया तरीका लाया है.

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